बड़ी उपलब्धि: - सीयूएसबी को नैनोप्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभिनव खोज के लिए पहला पेटेंट प्राप्त

Author किशोर अनिल
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बड़ी उपलब्धि:- सीयूएसबी को नैनोप्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभिनव खोज के लिए पहला पेटेंट प्राप्त

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दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) को नैनोप्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभिनव खोज के लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय से पहला भारतीय पेटेंट मिला है। पेटेंट संख्या 597876 वाले आविष्कार में शून्य आरपीएम आधारित हरित संश्लेषण और एनआईआर-II क्षेत्र में ट्यूनेबल प्लास्मोनिक होलो सिल्वर नैनोशेल्स विकसित किए गए हैं। यह उपलब्धि रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. अमिया प्रियम, शोधार्थी भावेश कुमार दाधीच और कलिंग औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर के डॉ. भव्य भूषण के शोध का परिणाम है। इस तकनीक में कैंसर उपचार और पर्यावरणीय शोधन की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं।

बड़ी उपलब्धि:- सीयूएसबी को नैनोप्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभिनव खोज के लिए पहला पेटेंट प्राप्त

अनिल मिश्र/पटना

अकादमिक उत्कृष्टता के लिए प्रख्यात दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) को नैनोप्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभिनव खोज के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा पहला भारतीय पेटेंट आधिकारिक रूप से प्रदान किया गया है। पेटेंट प्राप्त आविष्कार आवेदन संख्या 201931047638 तथा पेटेंट संख्या 597876 वाले पेटेंट का शीर्षक है “संवर्धित सौर-उत्प्रेरण हेतु प्रथम एवं द्वितीय निकट-अवरक्त क्षेत्र में ट्यूनेबल प्लास्मोनिक होलो सिल्वर नैनोशेल्स का शून्य आरपीएम संश्लेषण” है।

इस संबंध में दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सीयूएसबी के रसायन विज्ञान विभाग के प्रमुख आविष्कारक प्रो. अमिया प्रियम और शोधार्थी श्री भावेश कुमार दाधीच, तथा भुवनेश्वर स्थित कलिंग औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधान सहयोगी डॉ. भव्य भूषण के अथक परिश्रम का परिणाम है।

कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा, संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. अतुल प्रताप सिंह, विभाग के अन्य प्राध्यापकों तथा समस्त विश्वविद्यालय परिवार ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रो. प्रियम को बधाई दी। कुलपति प्रो. के. एन. सिंह ने कहा कि सीयूएसबी नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए अपने अनुसंधान बुनियादी ढाँचे तथा शैक्षणिक-सद्योगिक साझेदारियों को सक्रिय रूप से सुदृढ़ कर रहा है।

आविष्कार की प्रमुख उपलब्धियां एवं विशेषताएँ

• शून्य घूर्णन-गति आधारित हरित संश्लेषण:
यह विधि बिना किसी चुंबकीय या यांत्रिक सरगर्मी/हिलन (शून्य आरपीएम) के उच्च गुणवत्ता वाले नैनोशेल्स का संश्लेषण करती है। यह प्रक्रिया ऊर्जा की खपत को पूरी तरह समाप्त कर एक अत्यंत लागत-प्रभावी तथा पर्यावरण-अनुकूल (ग्रीन) निर्माण मार्ग स्थापित करती है।

• द्वितीय निकट-अवरक्त (एनआईआर-II) क्षेत्र में समायोज्यता:
खोखले रजत नैनोआवरणों के लिए अब तक दर्ज अधिकतम लाल-विस्थापन को प्राप्त करते हुए, सर्फेस प्लास्मोन रेजोनेंस को 1150 नैनोमीटर तक समायोजित करके द्वितीय निकट-अवरक्त क्षेत्र (एनआईआर-II, 1000–1400 नैनोमीटर) तक विस्तारित किया गया है।

• द्वि-प्लाज्मोनिक प्रणालियाँ:
40 से 62 नैनोमीटर के सूक्ष्म आकार वाले नैनोशेल्स में दो स्पष्ट तथा उच्च-तीव्रता वाले प्रकाशीय अवशोषण पीक - क्वाड्रुपोल (क्यू-एसपीआर, 450–560 नैनोमीटर) और सिमेट्रिक डाइपोल (एसडी-एसपीआर, 780–1150 नैनोमीटर) - सफलतापूर्वक उत्पन्न किए गए हैं।

• कैंसर उपचार एवं पर्यावरणीय शोधन:
यह तकनीक कैंसर के सटीक निदान एवं उपचार के लिए शरीर के गहरे ऊतकों तक प्रकाश पहुँचाने में सक्षम है। इसके साथ ही, यह नैनो-पदार्थ कपड़ा उद्योग से निकलने वाले हानिकारक डाई-अपशिष्टों (जैसे मिथाइल ऑरेंज और ब्रोमोक्रेसोल ग्रीन) का सौर ऊर्जा द्वारा सब-पिकोमोलर की अत्यंत सूक्ष्म सांद्रता पर भी तीव्र गति से विघटन एवं जल शोधन करने में सक्षम है।

प्रो. प्रियम ने बताया कि इस नैनोप्रौद्योगिकी अनुसंधान को अमेरिकी रासायनिक सोसायटी तथा रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री की प्रमुख शोध पत्रिकाओं में मान्यता प्राप्त हुई है। इस अनुसंधान को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शोध अनुदान भी प्रदान किया गया है।

प्रो. प्रियम ने कहा कि इस आविष्कार का उपयोग वस्त्र उद्योग से उत्पन्न रंगीन अपशिष्टों के पर्यावरणीय शोधन के लिए सौर ऊर्जा के दोहन में किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, नैनोआवरणों के गुणों का उपयोग कैंसर के उपचार के लिए भी किया जा सकता है।

प्रो. प्रियम ने कुलपति प्रो. के. एन. सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. अतुल प्रताप सिंह तथा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

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राजनीति और राज्य मामलों पर दो दशक का अनुभव।

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