स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बाजारवाद का बढ़ना भारतीय संस्कृति का क्षरण - महेश कुमार

Author किशोर अनिल | Writer अनिल मिश्रा
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स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बाजारवाद का बढ़ना भारतीय संस्कृति का क्षरण - महेश कुमार

Gaya

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बाजारवाद का बढ़ना भारतीय संस्कृति का क्षरण - महेश कुमार 

 

अनिल मिश्र/गया जी

 

कहानी विथ कॉफी की पच्चीस वीं कड़ी में चर्चित कहानीकार भीष्म साहनी की प्रसिद्ध कहानी चीफ की दावत पर आयोजित परिचर्चा में बाजारवाद के कारण मानवीय भावनाओं के कमजोर पड़ने को भारतीय संस्कृति का क्षरण बताया गया। इस कार्यक्रम की शुरूआत में सभी सदस्यों ने इस श्रृंखला की पच्चीस वीं कड़ी के आयोजन के लिए एक दूसरे को बधाई दी और नगर के लिए इसे एक उपलब्धि बताया । वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में सभी लोग मोबाइल के मायाजाल में इस तरह से बंध गए हैं कि साहित्य पढ़ने के लिए समय निकालना मुश्किल सा हो गया है। बिहार प्रदेश के गया जिला अंतर्गत टिकारी जैसे कस्बाई शहर में कहानी पर चर्चा को लेकर यदि पच्चीस माह से लगातार चर्चा आयोजित हो रही है तो यह चिन्हित करने योग्य है। कहानी का पाठ शहर के लोकप्रिय युवा शायर नदीम हसन ने किया। संवेदनाओं के साथ उनकी आवाज के उतर चढ़ाव ने लोगों को कहानी से बंधे रखा। वहीं कार्यक्रम के दूसरे चरण में राम प्रसाद सिन्हा ने कहानी की वैदिक काल से लेकर नानी की किस्सागोई और आज के वर्तमान कहानी के पड़ाव की विषाद चर्चा कर कार्यक्रम को गंभीर रूप दिया। सभी लोगों ने उनके इस शोधात्मक संबोधन को सराहा और सात आठ दशक के वय के इस पाठक की जिजीविषा की सराहना की। वहीं बनारस हिंदू विश्विद्यालय में हिंदी के शोध छात्र महेश कुमार ने कहानी चीफ की दावत की रचना के काल के पृष्ठभूमि और तत्कालीन वातावरण की चर्चा कर बड़ी गंभीरता से यह बताने में सफल रहे कि इस कहानी के माध्यम से भीष्म साहनी ने तत्कालीन समाज में घट रहे किस परिवर्तन की ओर उन्होंने पाठकों का ध्यान खींचा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बाजारवाद का बढ़ना और मानवीय भावनाओं का लगातार क्षरण ही उस समय के समाज को गहरे छू रहा था। उन्होंने बताया कि कैसे अपनी तरक्की के लिए उस समय रिश्तों को भी भेंट चढ़ाया जा रहा था । 

हिंदी के सेवानिवृत प्राध्यापक और शकुराबाद काॅलेज के पूर्व प्राचार्य शिवशंकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमें भारत की सनातन संस्कृति को बचाने की जरूरत है। हम सब अपनी पिछली पीढ़ी के ही दोषी नहीं हैं बल्कि अगली पीढ़ी को भी वो नहीं दे पा रहे हैं जिससे वह भारतीय संस्कृति से जुड़ सके। जबकि टिकारी शहर के प्रतिष्ठित हिंदी विषय के शिक्षक डॉ राजन ने कहा कि कहानी विथ कॉफी श्रृंखला की पच्चीस वीं कड़ी तक पहुंचकर हमें बहुत खुशी हो रही है । यह पूरे शहर के लिए एक उपलब्धि के समान है । इसी एक कहानी पर आधारित गंभीर चर्चा में शामिल होकर हम सब प्रसन्नता महसूस करते हैं । ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भी साहित्य और संवेदना से जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम को सुरेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार नारायण मिश्रा,खैरा विद्यालय के शिक्षक पवन कुमार, ब्रजेश कुमार आदि शामिल हुए। बी पी एन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा ने कार्यक्रम में आने के लिए सभी वक्ताओं, श्रोताओं और ऑन लाइन जुड़े हुए श्रोताओं को कार्यक्रम के लिए अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद दिया।इस बीच उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से चल रहा यह कार्यक्रम शहर में अनूठा है। कार्यक्रम का संचालन संजय अथर्व ने किया।

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किशोर अनिल

लेखक के बारे में

By किशोर अनिल

सीनियर एडिटर

राजनीति और राज्य मामलों पर दो दशक का अनुभव।

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